डेढ़ माह के मासूम को कुत्तों ने जबड़े में दबोचा
अजमेर: आवारा कुत्तों का कहर, डेढ़ माह के मासूम को झोपड़ी से उठाकर नोचा; इलाज के दौरान मौत
राजस्थान के अजमेर जिले के पीसांगन क्षेत्र से एक रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है। कालेसरा गांव में आवारा कुत्तों के एक हिंसक झुंड ने सो रहे डेढ़ महीने के शिशु पर हमला कर दिया। डॉक्टरों के अथक प्रयासों के बावजूद मासूम को बचाया नहीं जा सका।
सोते हुए मासूम पर हमला
यह दर्दनाक वाकया 24 अप्रैल की रात का है। पीड़ित परिवार झोपड़ी में रह रहा था। बच्चे की मां, केलम, बाहर भोजन बना रही थी और उसके दो बेटे—सावरा (1.5 माह) और अरविंद (3 वर्ष)—अंदर सो रहे थे। इसी बीच खूंखार कुत्तों का झुंड झोपड़ी में दाखिल हो गया। बड़ा बेटा कंबल में लिपटा होने के कारण कुत्तों की नजर से बच गया, लेकिन उन्होंने छोटे बच्चे को निशाना बनाया।
मां का साहस और संघर्ष
शिशु के चीखने की आवाज सुनकर मां जब अंदर पहुंची, तो मंजर देख उसके होश उड़ गए। एक कुत्ता बच्चे को अपने जबड़े में दबाए हुए था। मां ने हार नहीं मानी और करीब 5 मिनट तक कुत्तों से अकेले संघर्ष किया। बच्चे को छुड़ाने के बाद वह खुद उसके ऊपर लेट गई ताकि कुत्ते दोबारा हमला न कर सकें।
चिकित्सकीय इतिहास का सबसे गंभीर मामला
बच्चे को तुरंत अजमेर के जेएलएन (JLN) अस्पताल ले जाया गया। वहां की स्थिति के बारे में डॉक्टरों ने चौंकाने वाले खुलासे किए:
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15 साल का सबसे खतरनाक केस: पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की डॉ. गरिमा अरोड़ा के अनुसार, उनके करियर में यह सबसे भयावह डॉग बाइट केस था। कुत्तों ने बच्चे के पेट को इस कदर नोचा था कि उसकी आंतें बाहर आ गई थीं।
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अंगों ने काम करना बंद किया: डॉ. लखन पोसवाल ने बताया कि अस्पताल पहुँचने तक बच्चे का ब्लड प्रेशर न के बराबर था और किडनी फेल होने लगी थी।
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दम तोड़ा: डॉक्टरों ने सर्जरी कर आंतों को यथास्थान किया और बच्चे को वेंटिलेटर पर रखकर कई बार सीपीआर (CPR) दिया, लेकिन शरीर में फैले गहरे संक्रमण और भारी घावों के कारण मासूम ने दम तोड़ दिया।
प्रशासन के खिलाफ जन आक्रोश
इस घटना के बाद कालेसरा गांव और आसपास के क्षेत्रों में भारी शोक और रोष व्याप्त है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि प्रशासन आवारा कुत्तों की समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहा है। लोगों ने मांग की है कि नगर निकाय और स्थानीय प्रशासन तत्काल नसबंदी और आवारा कुत्तों को पकड़ने का अभियान चलाए ताकि किसी और परिवार का चिराग न बुझे।
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