भजनलाल सरकार की रणनीति: वरिष्ठ नेताओं को मिलेगी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी
जयपुर: राजस्थान में भाजपा सरकार के ढाई वर्ष का कार्यकाल पूरा होते ही अब शासन और संगठन में नई जान फूंकने की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य के विभिन्न बोर्डों, आयोगों और निगमों में रिक्त पड़े पदों को भरने के लिए सियासी हलचल तेज है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की हालिया दिल्ली यात्रा और केंद्रीय नेताओं से मुलाकात के बाद माना जा रहा है कि राजनीतिक नियुक्तियों का पिटारा जल्द ही खुल सकता है।
सत्ता और संगठन में संतुलन की कवायद
राजस्थान की राजनीतिक परंपरा के अनुसार, सरकार के कार्यकाल का मध्य समय आने पर कार्यकर्ताओं को संतुष्ट करने और संगठन के साथ तालमेल बिठाने के लिए नियुक्तियां की जाती हैं। वर्तमान में करीब 100 से ज्यादा महत्वपूर्ण संस्थाओं में अध्यक्ष और सदस्यों के पद खाली हैं। सूत्रों के अनुसार, सरकार ने संभावित उम्मीदवारों की सूची तैयार कर ली है और अब बस आलाकमान की अंतिम मुहर का इंतजार है।
जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों पर फोकस
इस बार नियुक्तियों में केवल वरिष्ठता को ही आधार नहीं बनाया जा रहा है, बल्कि आगामी चुनावों को देखते हुए जातीय और क्षेत्रीय संतुलन का भी खास ख्याल रखा गया है। जिन वर्गों को कैबिनेट में जगह नहीं मिल पाई, उन्हें इन बोर्डों और आयोगों में जिम्मेदारी देकर समायोजित करने की रणनीति है। महिला आयोग, पर्यटन निगम, और खेल परिषद जैसे महत्वपूर्ण विभागों में अनुभवी चेहरों को जगह मिल सकती है।
कतार में दिग्गज और हजारों कार्यकर्ता
राजनीतिक नियुक्तियों की इस दौड़ में पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया, राजेंद्र राठौड़ और पूर्व सांसद रामचरण बोहरा जैसे बड़े नामों के साथ-साथ कई पूर्व विधायकों के नाम भी चर्चा में हैं। केवल राज्य स्तर ही नहीं, बल्कि जिला स्तर तक करीब 12,000 से अधिक सक्रिय कार्यकर्ताओं को विभिन्न समितियों और निकायों में पद देकर सरकार के काम को जमीनी स्तर तक पहुंचाने की तैयारी है।
T20 World Cup विवाद पर तमीम इकबाल ने पूर्व BCB अध्यक्ष को भी घेरा
IPL 2026 में धमाकेदार प्रदर्शन के बाद माधव तिवारी का बयान जीत रहा दिल
मार्क जुकरबर्ग का सख्त कदम: मेटा में 8000 नौकरियां गईं, एआई को मिला फोकस
बड़ा बाग कब्रिस्तान के पास विवाद में फंसी मेट्रो, 2028 तक शुरू होना मुश्किल
Delhi Capitals ने किया IPL इतिहास का दूसरा सबसे बड़ा सफल रनचेज