जबलपुर को नहीं मिला लॉजिस्टिक पार्क
भोपाल । राजधानी भोपाल में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट प्रदेश के इतिहास में अब तक की सबसे सफल इन्वेस्टर्स समिट साबित हुई है। प्रदेश के इतिहास में 2023 तक हुई 7 समिट में कुल 33.19 लाख निवेश के प्रस्ताव मिले थे, जबकि अकेले भोपाल में 24 और 25 फरवरी को 2025 में सरकार को कुल 30.77 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव आए हंै। लेकिन विडंबना यह रही की खनिज संपदा से परिपूर्ण महाकौशल के हाथ निराशा लगी।जबलपुर सहित महाकौशल क्षेत्र को लॉजिस्टिक पार्क को लेकर जो उम्मीदें थीं, वे ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 में धराशायी हो गईं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार के द्वारा उद्योगों की स्थापना को प्रोत्साहन देने के लिए उठाए गए कदम भारत के विकास को भी गति देने का कार्य कर रहे हैं। मप्र निश्चित ही प्रमुख उद्योग राज्य बनेगा। मप्र में निवेशकों में निवेश करने के प्रति विश्वास बढ़ा है। स्थायी और सशक्त सरकार, पारदर्शी प्रशासन, उपयोगी नीतियां, सहयोगी सामाजिक वातावरण, आर्थिक प्रगति के लिये ऐसे आधार हैं, जो मप्र में मौजूद हैं। मप्र देश का ऐसा पहला राज्य है जिसने जनविश्वास अधिनियम, ईज ऑफ डूइंग के माध्यम से पहल की है। सरकार ने इंदौर के बाद भोपाल में लॉजिस्टिक पार्क की घोषणा कर दी, लेकिन जबलपुर को इसमें शामिल नहीं किया। इससे महाकौशल, बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र की औद्योगिक संभावनाओं को बड़ा झटका लगा है।
भोपाल को मिला, जबलपुर रह गया पीछे
धार और पीथमपुर में करीब 255 एकड़ में मध्य भारत के सबसे बड़े और प्रदेश के पहले मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक पार्क के निर्माण के बाद अब राजधानी भोपाल को भी लॉजिस्टिक हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना के लिए 2200 करोड़ रुपए का बजट तय किया गया है। वहीं, जबलपुर के लिए ऐसी कोई योजना घोषित नहीं की गई, जबकि यह भौगोलिक रूप से एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र है। सरकार लगातार औद्योगिक विकास की बात कर रही है, लेकिन महाकौशल को अब तक कोई बड़ा औद्योगिक प्रोजेक्ट नहीं दिया गया। इंदौर और भोपाल जैसे बड़े शहरों को लॉजिस्टिक पार्क की सौगात मिल रही है, लेकिन जबलपुर को इससे वंचित रखा गया। इससे स्थानीय व्यापारियों, उद्योगपतियों और युवाओं में निराशा है।
महाकौशल और विंध्य को होता सीधा लाभ
अगर जबलपुर में लॉजिस्टिक पार्क स्थापित किया जाता, तो इससे महाकौशल, बुंदेलखंड और विंध्य के जिलों को सीधा लाभ मिलता। खासतौर पर जबलपुर, छिंदवाड़ा, बालाघाट, सिवनी, मंडला, नरसिंहपुर, बैतूल, डिंडोरी, कटनी, दमोह, टीकमगढ़, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, सतना, रीवा और सीधी जैसे जिलों के व्यापार और उद्योग को गति मिलती। जबलपुर में लॉजिस्टिक पार्क बनने से प्रदेश के कई क्षेत्रों को उसका लाभ मिलता। जबलपुर मप्र के केंद्र में स्थित है, जिससे पूरे राज्य में समान रूप से आपूर्ति संभव होती। जबलपुर रेलवे और सडक़ परिवहन का बड़ा केंद्र है, जिससे लॉजिस्टिक्स संचालन में तेजी आती। जबलपुर में औद्योगिक विकास की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी के कारण उद्योग नहीं बढ़ पा रहे। महाकौशल में कृषि और खनिज संसाधनों की भरमार है, जिसे सही लॉजिस्टिक्स सपोर्ट से बड़े बाजारों तक पहुंचाया जा सकता था।
जबलपुर में रिन्यूएबल एनर्जी पर फोकस
भोपाल में दो दिन तक चली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में सबसे ज्यादा 5.82 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव भोपाल संभाग को मिले हैं। निवेश के मामले में इंडस्ट्रियलिस्ट की पहली पसंद रहने वाला इंदौर इस बार उज्जैन से भी पिछड़ता दिख रहा है। उज्जैन में 4.77 लाख करोड़ के प्रस्ताव आए हैं, जबकि इंदौर में 4.76 लाख करोड़ के प्रस्ताव हैं। नर्मदापुरम में 2.93 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। जबलपुर संभाग के लिए 1.06 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। इसमें सबसे ज्यादा फोकस रिन्यूएबल एनर्जी पर है। अवाडा ग्रुप भी यहां बड़ा निवेश करने की घोषणा कर चुका है।
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